प्रेरणादायक कविता : कदम थोड़ा तेज बड़ा।
कदम थोड़ा तेज बड़ा,
यहां जंग जारी है।
तराश खुद को तू ,खुद को नया बनाने में।
सिमटा न रह चंद कागज की सफलताओं में।
खुले आसमां में पतंग उड़ाना कहा मुश्किल है,
उड़ा पतंग तू तूफानों के शोरों में।
है निरर्थक पूछ तेरी, अगर खड़ा है तू उपजाऊ भूमि में,
अगर है हिम्मत तो उग कर दिखा बंजर भूमि में।
मत बैठ मेहनत असीर कर लकीरो की ओट में,
इन लकीरों का तू गुलाम नहीं बता दे इस दुनिया में।
उस नाम का भी क्या जो लिखा गया हो पानी में,
बन ऐसा की नाम छपे अमिट पत्थर की दीवारों में।
अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहे।
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Nice post
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteबहुत ही उत्साहपूर्ण कविता हैं
ReplyDeleteधन्यवाद
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