प्रेरणादायक कविता :हार ना जा तू अभी से

 



हार ना जा तू अभी से,

जीतने को अभी तो कई कदम बाकी हैं।

खुली आंखों से देखे जो सपने तूने,

उनमें अभी जान फुकनी बाकी है।


देख वो नन्हा बीज,

कैसे संघर्ष करता रहता है।

दिन रात धूल पत्थर से लड़,

एक पौंधा बनता है।


देख एक पंछी कोमल पंखों से,

कैसे अथाह आसमां को छू लेता है।

गिरता वो भी होगा कई बार, 

पर फिर भी कोशिश करता है।


देख खाना लेकर एक नन्ही चींटी,

गिरते ,फिसलते कई मील चलती है।

शून्य पर भी पहुंचकर, 

कैसे वो मंजिल पाती है।


देख समुंद्र की विराट लहरों को, 

कैसे एक छोटी नाव चुनौती देती है।

लड़ कर उन लहरों से,

वो  किनारे आती है। 

"रोशनी"


अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहे। 

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