प्रेरणादायक कविता - ख़ुशी पर कविता

परी


 यूँ ही बैठी थी राहों पर,

किसी के इंतज़ार में। 

तभी पास मुस्कान  लिए,

 एक परी आयी,

बोली किसका इतंज़ार है तुझे|

पास हूँ तेरे फिर भी,

तुझे मेरा अहसास नहीं,

मुझे छोड़ किस गम का इंतज़ार है तुझे।

जैसे ही मैं अपने दुखों  को ,

 बँया कर रही उससे, 

तभी वो अचानक ,

पीछे  मुड़ी और बोली,

नही जरूरत तुझे मेरी,

नही लौटके आउंगी मैं ,

 अब तेरे पास कभी।

उसके जाने के बाद एक अहसाह हुआ,

आखिर किसका इंतज़ार था ,

और है,अब भी मुझे।

खुद चलकर आयी वो परी 

इतना करीब होकर भी,

 क्यों दूर हुई मुझसे। 


मैने उसे आवाज लगायी वो ना रुकी,

पर कुछ बोली वो धीरे से। 

जब कभी कोई गम का इंतज़ार करेगी,

तो याद कर लेना मुझे।

मैं अक्सर तेरे पास ही हूँ ,

बस अहसास कर के तो देखना, 

पास तेरे मुस्करातें  हुए ,

मिलूंगी मैं उस दिन तुझे।

परी, वो कोई और नही

 खुशियां थी, मेरी ज़िंदगी की। 

उस दिन मुझे एकअहसाह हुआ की,

क्यों करते है हम इंतज़ार उसका,

 जो पास नही,

पर जो पास है उसका तो,

हमें कोई अहसाह ही नही। 

तभी परेशां हैं,अपनी ज़िन्दगी से सभी, 

क्योंकि 

उस प्यारी सी परी को जाने देते है,

अपनी ज़िंदगी से अक्सर यूँ ही।

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अपना कीमती वक़्त देकर इस पोस्ट को पढ़ने के धन्यवाद,आपको यह पोस्ट कैसी लगी जरूर बताईयेगा। 

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