प्रेरणादायक कविता :मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ |
💢 प्रेरणा 💢
मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ ,
क्यों मैं उसे दुनिया में ढूँढू।
ज्ञान का मैं अथाह ब्रह्मांड हूँ।
हाँ गिरा भी हूँ ,हारा भी हूँ ,
दुनिया से लड़कर ही मैं,
खुद से खड़ा भी हूँ।
तपती धूप मैं तपा भी हूँ,
सर्द रातों से लड़ा भी हूँ।
पर सबसे जूझ कर मैं,
ऊंचाईयो में उड़ा भी हूँ।
कोशिश करते करते,
कई बार गिरा भी हूँ,
कभी मजाक बना तो,
कभी पागल भी कहलाया हूँ।
मंजिल से घबराता भी हूँ,
कई राहों को बदलता भी हूँ।
फिर भी मैं रुकता नही,
चलता जाता हूँ।
किस्मत से हारा भी हूँ,
जिंदगी के समंदर में डूबा भी हूँ।
पर हौसलो का दामन थामे,
समंदर की गहराइयों से सीख कर,
ऊपर आया भी हूँ।
_______________******__________
अपना कीमती वक़्त देकर इस पोस्ट को पढ़ने के धन्यवाद,आपको यह पोस्ट कैसी लगी जरूर बताईयेगा।मेरी और भी पोस्ट यहाँ पढ़े :-

Very good
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteBbut ache
ReplyDeleteVery nice Awseme superb
ReplyDeleteVery good
ReplyDelete