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Showing posts from August, 2022

दरिंदे

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                                कुचल गए जो फूल को वह कांटे कुछ साल और पनपेंगे। मां आस लगाए इस बेरुखी सरकार से, वह सरकार तो नींद से कुछ साल बाद ही उठेगी।  जिंदा जला गए बेरहम गुड़िया को,  गुनहगार कि अभी कुछ साल और खातिरदारी होगी,  तब कहीं जाकर सरकार की नींद खुलेगी  और शायद ही उनको सजा मिलेगी।  दरिंदों को डर नहीं अभी वह कितने क़त्ल करेंगे, ए बहरी सरकार सुन ले,  अपनी पर बात आने से पहले संभाल ले। यह तड़प से तुम गुस्सा दिखा रही हो,  रोड में मोमबत्ती जलाकर और खिलाफ आवाज उठा कर,  कुछ समय बाद तुम भी भूल जाओगे , पर मां न्याय की आस में हर पल तड़पते रहेगी।  वह बाप जिसकी परी के तुम पंख काट गए , उसमें तुम न जाने कितने सपने थे।  वह आजाद हवा में अपनी परी को उड़ाना चाहता था,  उसे क्या पता था दरिंदे बांज उसे नोच खायेंगे। **********

प्रेम

दुनिया में मौजूद सभी रिश्तो की एक अहम है कड़ी है :प्रेम, चाहे इंसान का इंसान से सम्बन्ध हो या जानवर का इंसान से, बिना प्रेम के संबंधों का यथार्थ रूप में धरातल में रहना उतना ही कठिन होता, जितना बिना सूर्य के इस धरती के जीवन की कल्पना करना। आखिर प्रेम कहाँ से आता है? अगर धरती पर यह मौजूद है तो हर किसी से इसका अनुभव होना चाहिये था परन्तु ऐसा नहीं है तो प्रेम का वजूद क्या है?           इन सभी प्रश्नों के ढेरों ने अनायाश ही मेरे मस्तिष्क में अपना डेरा बना लिया है, जहाँ तक मैं इनका हल सोच सकती है, प्रेम हमारे भीतर ही मौजूद है बस हम उसे महसूस करने का जरिया किसी अन्य को बनाते है, अब प्रश्न यह उठता है कि जब स्वयं के भीतर ही प्रेम का सागर है तो हम एक बूंद के लिए दूसरे पर निर्भर क्यों रहते हैं ?          हमें खुद को अच्छा बताया जाना, तारिफ सुनना इतना पसन्द होता है कि उसके लिए हम दूसरे की तारिफ करने लगते है ताकि हमें उनको तारिफ के वे बादल मिले जो हमें बारिश रूपी सुकुन दे सके, जब इन्सान स्वयं में ही प्रेम से परिपूर्ण है तो उसको दूसरे पर ही ...

दोस्त

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  एक रिश्ता जो हम खुद बनाते है,   उसका नाम है दोस्ती। ज़िन्दगी कोरे पन्नो की एक किताब थी,  भर गई  जिन एहसासों से उसका नाम है दोस्ती। यूं तो कही लोग आते है ज़िन्दगी में  महज़ एक अजनबी  बनके,  पर कुछ रह जाते है  यादो के किसी कोने में, एक दोस्त बनके। अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहें। स्कूल की पुरानी यादें हार ना जा तू अभी से मातृ भाषा   नन्हा पौधा वो संघर्ष करता रहा।   आज मैं कैसे हार सकती हूं तूफान लाख पथ में काँटे हो   मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ , तुझे चलना ही होगा   कितना है समय कीमती  ज़िंदगी की वास्तविकता ज़िंदगी में सकारात्मकता प्रेरणादायक विचार चलो आज एक नयी जिंदगी लिखते हैं। बंद मुट्ठी मे बैठ तराश रहा हूं मैं खुद को ख़ुशी पर कविता:परी हिंदी भाषा किताब आंखिर क्यों?

आंखिर क्यों?

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                                    वक्त का पहिया तेज चल रहा है,  ना जाने क्यों आंखें मूंद खड़ी हुई हूं मैं। लकीरे मेरी हाथों की बेशक  लंबी है,  ना जानें क्यों उनको काट रही हूं मैं। कदम जो मैंने तय किए थे आसमां छूने के, ना जाने क्यों उन कदमों से मुंह फेर रही हूं मैं। कभी संघर्ष किया धरती से बाहर आने में, अब क्यों धरती में वापस जाना चाहती हु मैं। अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहें। स्कूल की पुरानी यादें हार ना जा तू अभी से मातृ भाषा   नन्हा पौधा तूफान वो संघर्ष करता रहा।   आज मैं कैसे हार सकती हूं लाख पथ में काँटे हो   मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ , तुझे चलना ही होगा   कितना है समय कीमती  ज़िंदगी की वास्तविकता ज़िंदगी में सकारात्मकता प्रेरणादायक विचार चलो आज एक नयी जिंदगी लिखते हैं। बंद मुट्ठी मे बैठ तराश रहा हूं मैं खुद को ख़ुशी पर कविता:परी हिंदी भाषा ...

पापा

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                                                                       कौन कहता है मैं आपसे दूर हूँ,  खुद की परछाई में भी मैं आपको पाती हूँ। अक्सर जब भी मैं खुद को देखु, बस आपकी ही मौजुदगी नज़र आती है। हूबहू आपसे मिलता मेरा चेहरा महसूस  नही होने देता कि मैं आपसे दूर हूँ।  जब कभी याद सताती है आपकी, मैं  आईने के पास बैठ जाती  हूँ, उसमें खुद को नहीं बस आपको ही पाती हूँ। कितने सवाल पूछती और कितनी बाते किया करती हूँ,  उस आईने को मैं जी भर के निहारा करती हूं। मेरी धड़कनो की आवाज में भी आपकी ही आवाज पाती हूँ,   कौन कहता है मैं आपसे दूर हूँ। अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहें। स्कूल की पुरानी यादें हार ना जा तू अभी से मातृ भाषा   आँखिर क्यों? तूफान नन्हा पौधा वो...