दरिंदे

                              




 कुचल गए जो फूल को वह कांटे कुछ साल और पनपेंगे।

मां आस लगाए इस बेरुखी सरकार से,

वह सरकार तो नींद से कुछ साल बाद ही उठेगी।


 जिंदा जला गए बेरहम गुड़िया को,

 गुनहगार कि अभी कुछ साल और खातिरदारी होगी,

 तब कहीं जाकर सरकार की नींद खुलेगी 

और शायद ही उनको सजा मिलेगी।


 दरिंदों को डर नहीं अभी वह कितने क़त्ल करेंगे,

ए बहरी सरकार सुन ले,

 अपनी पर बात आने से पहले संभाल ले।


यह तड़प से तुम गुस्सा दिखा रही हो,

 रोड में मोमबत्ती जलाकर और खिलाफ आवाज उठा कर,

 कुछ समय बाद तुम भी भूल जाओगे ,

पर मां न्याय की आस में हर पल तड़पते रहेगी।


 वह बाप जिसकी परी के तुम पंख काट गए ,

उसमें तुम न जाने कितने सपने थे।

 वह आजाद हवा में अपनी परी को उड़ाना चाहता था,

 उसे क्या पता था दरिंदे बांज उसे नोच खायेंगे।





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