प्रेरणादायक कविता:-कैसे ये सफर पार नहीं होगा।
माना भाग्य के पंख नही ,
जो उड़ कर पार होगा,
मेहनत के कदम तो हैं ,
तो चलकर पार होगा।
आंसुओ की धार में है
लिपटे कई रिश्ते,
कई सुविधाएं, तो कई किस्से।
बहाकर इन आंसुओ को,
चल पड़ी हूं जब सफर में,
तो कैसे ये सफर पार नहीं होगा।
संघर्ष पथ पर मैं चल पड़ी हूं,
कभी खुद से तो कभी अपनो से लड़ी हूं।
कई खुशियो को मैने फांसी लगाई है,
तो कई दफा हृदय पाषाण भी बनाया है,
दिए जब मैंने इतने बलिदान,
तो कैसे ये सफर पार नहीं होगा।
माना मुश्किल बहुत आएंगी,
कभी डरूंगी,तो कभी हार जाऊंगी।
कभी खुद को खुद से ही दूर पाऊंगी,
कदमों में है जब भरोसे का जूता,
तो कैसे ये सफर पार नहीं होगा।
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अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहे।
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Ase hi likhte rho. Bhut shandar
ReplyDeleteBhut shandar
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteGreat
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