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प्रेरणादायक कविता :हार ना जा तू अभी से

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  हार ना जा तू अभी से, जीतने को अभी तो कई कदम बाकी हैं। खुली आंखों से देखे जो सपने तूने, उनमें अभी जान फुकनी बाकी है। देख वो नन्हा बीज, कैसे संघर्ष करता रहता है। दिन रात धूल पत्थर से लड़, एक पौंधा बनता है। देख एक पंछी कोमल पंखों से, कैसे अथाह आसमां को छू लेता है। गिरता वो भी होगा कई बार,  पर फिर भी कोशिश करता है। देख खाना लेकर एक नन्ही चींटी, गिरते ,फिसलते कई मील चलती है। शून्य पर भी पहुंचकर,  कैसे वो मंजिल पाती है। देख समुंद्र की विराट लहरों को,  कैसे एक छोटी नाव चुनौती देती है। लड़ कर उन लहरों से, वो  किनारे आती है।  "रोशनी" अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहे।  मेरी और भी पोस्ट पढ़े - पतंग नन्हा पौधा आज मैं कैसे हार सकती हूं वो संघर्ष करता रहा।   मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ , मातृ भाषा बंद मुट्ठी मे बैठ तराश रहा हूं मैं खुद को लाख पथ में काँटे हो तुझे चलना ही होगा   कितना है समय कीमती  एक जीत है तेरे आगे चलो आज एक नयी जिंद...

प्रेरणादायक कविता:-कैसे ये सफर पार नहीं होगा।

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 कैसे ये सफर पार नहीं होगा। माना भाग्य के पंख नही , जो उड़ कर पार होगा, मेहनत के कदम तो हैं , तो चलकर पार होगा। आंसुओ की धार में है  लिपटे कई रिश्ते, कई सुविधाएं, तो कई किस्से। बहाकर इन आंसुओ को, चल पड़ी हूं जब सफर में, तो कैसे ये सफर पार नहीं होगा।  संघर्ष पथ पर मैं चल पड़ी हूं, कभी खुद से तो कभी अपनो से लड़ी हूं। कई खुशियो को मैने फांसी लगाई है, तो कई दफा हृदय पाषाण भी बनाया है, दिए जब मैंने इतने बलिदान, तो कैसे ये सफर पार नहीं होगा। माना मुश्किल बहुत आएंगी, कभी डरूंगी,तो कभी हार जाऊंगी। कभी खुद को खुद से ही दूर पाऊंगी, कदमों में है जब भरोसे का जूता, तो कैसे ये सफर पार नहीं होगा। ***** अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहे।  मेरी और भी पोस्ट पढ़े - हार ना जा तू अभी से     नन्हा पौधा आज मैं कैसे हार सकती हूं वो संघर्ष करता रहा।   मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ , बंद मुट्ठी मे बैठ तराश रहा हूं मैं खुद को लाख पथ में काँटे हो तुझे चलना ही होग...

आज मैं कैसे हार सकती हूं।

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                                                           अडिग रही उस पथ पर  अंगारों का जहाँ दरिया था। आज धूप में चलने से , मैं कैसे रुक सकती हूं। लड़ सागर की लहरों से , पाई जब मैंने मंजिल। आज दरिया में गोता लगाने से,  मैं कैसे डर सकती हूं। तोड़ तानों के पिंजरे को , उड़ गई ऊंचाइयों में। आज दुनिया की बातें सुन , मैं कैसे हार सकती हूं। चीर पत्थर की छाती को , संघर्ष से जब खड़ी हुई। आज कंकड़ के टुकड़े से , मैं कैसे दब सकती हूं। **** अपना कीमती वक़्त देकर इस पोस्ट को पढ़ने के   धन्यवाद , आपको यह पोस्ट कैसी लगी जरूर बताईयेगा।  मेरी और भी पोस्ट यहाँ पढ़े :- स्कूल की पुरानी यादें हार ना जा तू अभी से वो संघर्ष करता रहा।   मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ , लाख पथ में काँटे हो तुझे चलना ही होगा   कितना है समय कीमती  एक जीत है तेरे आगे ज़िंदगी की वास्तविकता ज़िंदगी में सकारात्मकता प्रेरणादायक विचार चलो आज एक नयी ज...