प्रेरणादायक कविता
अक्सर हम सफर की शुरुवात तो कर देते हैं, परन्तु बहुत कम लोग ही होते हैं जो मंजिल तक पहुंच पाते हैं। जिसका कारण है या तो हम डर जाते हैं, या हार कर बैठ जाते हैं। प्रायः देखा गया है कि ,लोगो में वह जूनून की कमी हो जाती है, जो सफर के शुरुवाती समय में उनके अंदर होती है। इसलिए सफर में चाहे लाख रुकावटें क्यों ना हो हमको बस अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान केंद्रित करके सफर में चलना है और अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है। चलिए कुछ पंक्तियाँ पढ़ते हैं, जो निःसंदेह आपको आपके सफर में चलने के लिए उत्साहवर्द्धन करेगी। तुझे चलना ही होगा। (You have to walk) वक्त के पहिये तोड़ नहीं सकता तू, चाल खुद की तुझे ही बढ़ानी होगी। कुरुक्षेत्र में आ ही गया तो, डरकर नही डटकर लड़ना होगा। तुझे चलना ही होगा। रिश्वत ,नाम, छल कपट, रूप के कितने ही तीर चले, तुझे सबमें ज्ञान रूपी प्रहार करना होगा। तुझे चलना ही होगा। अपने रथ का सारथी ढूंढ रहा है तू, तुझे खुद ही रथ चलाना होगा। मन के युद्ध से कर्म के यु...