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Showing posts from June, 2021

वो संघर्ष करता रहा।

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                 वो रेत सा उड़ पहाड़ों से संघर्ष करता रहा, मैं बंद मुट्ठी में बैठ लकीरें गिनता रहा। वो छू आसमां, पहचान बनता रहा, मैं हार कर, उसके संघर्ष सुनते रहा। वो अपनी हर कमी को कामयाबी का द्वार बनाता रहा,  मैं कमी खुद में ही हजार ढूढता  रहा। लहरों से लड़ वो उस किनारे आगया, मैं नाव जल में उतारने से घबराता रह गया।   राह अपने बनाकर वो, सफल हो गया। मैं उसकी राहों में ही भटकता रह गया। **** अपना कीमती वक़्त देकर इस पोस्ट को पढ़ने के  धन्यवाद , आपको यह पोस्ट कैसी लगी जरूर बताईयेगा।  मेरी और भी पोस्ट यहाँ पढ़े :- स्कूल की पुरानी यादें मातृ भाषा हिंदी भाषा ओस का मोती पतंग हार ना जा तू अभी से आज मैं कैसे हार सकती हूं मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ , लाख पथ में काँटे हो तुझे चलना ही होगा   कितना है समय कीमती  एक जीत है तेरे आगे ज़िंदगी की वास्तविकता बंद मुट्ठी मे बैठ तराश रहा हूं मैं खुद को ज़िंदगी में सकारात्मकता प्रेरणादायक विचार चलो आज एक नयी जिंदगी लिखते हैं। ख़ुशी पर कविता:परी किताब नन्हा पौधा

किताब

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  किताब  सहमी सी पड़ी वो, एक पुरानी सी अलमारी में ,  ताकती दिन-रात, धूल भरे शीशे के कोने से।  खुद की आबरू बिक जाने की डर में, चुप चुप सी रहती, उस अलमारी के कोने में। जो कभी सिरहाने मैं पड़ी रहती, तो कभी देर रात तक हमसे बातें करती, वो हमारी नींद और खुद में, बड़ी जुस्तजू करती दिखती थी। आज बेजुबान सी पड़ी रहती, उस अलमारी के कोने में।  एकटक निहारती,   वो बीते पलो को याद कर , उस मंज़र के फिर से होने की राह तकती है।  मिटते शब्दो की स्याही से बयाँ होता , वो खूब आंसू बहाती , उस सुनसान सी, अलमारी के कोने  में। सबकी आँखे टिकी रहती , अब एक छोटे से डब्बे में।  देख ये नज़ारा मचलती वो किताबें, कुछ गुफ्तगू करने को, कुछ खुद की कहने और, कुछ हमारी सुनने को।  पर खौप से चुप रहती , उस अलमारी के कोने में।  __________________******____________   अपना कीमती वक़्त देकर इस पोस्ट को पढ़ने के  धन्यवाद , आपको यह पोस्ट कैसी लगी जरूर बताईयेगा।  मेरी और भी पोस्ट यहाँ पढ़े :- हार ना जा तू अभी से नन्हा पौधा वो संघर्ष करता रहा। आज...

प्रेरणादायक कविता :मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ |

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 💢  प्रेरणा 💢                                 मैं  अपनी ही प्रेरणा हूँ , क्यों मैं उसे दुनिया में ढूँढू। ज्ञान का  मैं  अथाह ब्रह्मांड  हूँ।  हाँ गिरा भी हूँ ,हारा भी   हूँ  , दुनिया से लड़कर ही मैं, खुद से खड़ा भी  हूँ । तपती धूप मैं तपा भी हूँ ,  सर्द रातों से लड़ा भी  हूँ । पर सबसे जूझ कर मैं,  ऊंचाईयो में उड़ा भी  हूँ । कोशिश करते करते,  कई बार गिरा भी  हूँ,   कभी मजाक बना तो,  कभी पागल भी कहलाया   हूँ । मंजिल से घबराता भी   हूँ ,  कई राहों को बदलता भी   हूँ । फिर भी मैं रुकता नही,  चलता जाता   हूँ । किस्मत से हारा भी    हूँ ,  जिंदगी के समंदर में डूबा भी  हूँ ।  पर हौसलो का दामन थामे,  समंदर की  गहराइयों से सीख कर,  ऊपर आया भी    हूँ । _______________******__________ अपना कीमती वक़्त देकर इस पोस्ट को पढ़ने के धन्यवाद , आप...

प्रेरणादायक कविता - ख़ुशी पर कविता

परी  यूँ ही बैठी थी राहों पर, किसी के इंतज़ार में।  तभी पास मुस्कान  लिए,  एक परी आयी, बोली किसका इतंज़ार है तुझे| पास हूँ तेरे फिर भी, तुझे मेरा अहसास नहीं, मुझे छोड़ किस गम का इंतज़ार है तुझे। जैसे ही  मैं अपने दुखों  को ,  बँया कर रही उससे,  तभी वो अचानक , पीछे  मुड़ी और बोली, नही जरूरत तुझे मेरी, नही लौटके आउंगी मैं ,  अब तेरे पास कभी। उसके जाने के बाद एक अहसाह हुआ, आखिर किसका इंतज़ार था , और है,अब भी मुझे। खुद चलकर आयी वो परी  इतना करीब होकर भी,  क्यों दूर हुई मुझसे।  मैने उसे आवाज लगायी वो ना रुकी, पर कुछ बोली वो धीरे से।  जब कभी कोई गम का इंतज़ार करेगी, तो याद कर लेना मुझे। मैं अक्सर तेरे पास ही हूँ , बस अहसास कर के तो देखना,  पास  तेरे  मुस्करातें  हुए , मिलूंगी मैं उस दिन तुझे। परी,  वो  कोई और नही  खुशियां थी,  मेरी ज़िंदगी  की ।  उस दिन मुझे एकअहसाह हुआ की, क्यों करते है हम इंतज़ार  उसका,  जो पास नही, पर जो पास है उसका तो, हम...

परिश्रम पर प्रेरणादायक कविता

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 लाख पथ में काँटे हो।                                                     अधिकांश लोग जिंदगी में वो मुकाम हासिल नहीं कर पाते हैं ,जिसके वो हक़दार होते हैं।  ऐसा इसलिए होता है ,या तो वो मेहनत करने से घबराते हैं ,या अनुकून परिस्थिति ना होने के कारण वो अपने सपने पूरे नहीं कर पाते हैं। कुछ तो ऐसे होते हैं जो हाथ में हाथ धरे यह सोचते हैं की अब किस्मत के फरिशते  आएंगे और मुझे वह सफलता की उड़ान  भरने को पंख देंगे , यह तो बस कोरी कल्पना मात्र है। ऐसा कुछ नहीं होने वाला, किस्मत उनका ही साथ देती है जो परिश्रम  करके खुद को उस शिखर के काबिल बनाते है जिसमे वो चढ़ना चाहते हैं। शर्त ये है की  परिश्रम  उपयोगी जगह  किया गया  हो।           चलिए अब कुछ  पंक्तियाँ  पढ़ते  हैं , जो आपके अंदर जोश भर देगी जिससे आप अपने कार्य को दुगने परिश्रम से करेंगे। ...