वो संघर्ष करता रहा।
वो रेत सा उड़ पहाड़ों से संघर्ष करता रहा, मैं बंद मुट्ठी में बैठ लकीरें गिनता रहा। वो छू आसमां, पहचान बनता रहा, मैं हार कर, उसके संघर्ष सुनते रहा। वो अपनी हर कमी को कामयाबी का द्वार बनाता रहा, मैं कमी खुद में ही हजार ढूढता रहा। लहरों से लड़ वो उस किनारे आगया, मैं नाव जल में उतारने से घबराता रह गया। राह अपने बनाकर वो, सफल हो गया। मैं उसकी राहों में ही भटकता रह गया। **** अपना कीमती वक़्त देकर इस पोस्ट को पढ़ने के धन्यवाद , आपको यह पोस्ट कैसी लगी जरूर बताईयेगा। मेरी और भी पोस्ट यहाँ पढ़े :- स्कूल की पुरानी यादें मातृ भाषा हिंदी भाषा ओस का मोती पतंग हार ना जा तू अभी से आज मैं कैसे हार सकती हूं मैं अपनी ही प्रेरणा हूँ , लाख पथ में काँटे हो तुझे चलना ही होगा कितना है समय कीमती एक जीत है तेरे आगे ज़िंदगी की वास्तविकता बंद मुट्ठी मे बैठ तराश रहा हूं मैं खुद को ज़िंदगी में सकारात्मकता प्रेरणादायक विचार चलो आज एक नयी जिंदगी लिखते हैं। ख़ुशी पर कविता:परी किताब नन्हा पौधा